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Bihar Politics: अनंत सिंह के जनसुराज में शामिल होने की अटकलों पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान, बोले- ऐलान के बाद ही होगा फैसला

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | अनंत सिंह के जनसुराज में शामिल होने की अटकलों के बीच प्रशांत किशोर ने कहा कि पार्टी में आने का ऐलान होने के बाद ही इस पर फैसला लिया जाएगा।

पटना, 5 अक्टूबर आलम की खबर: बिहार की राजनीति में मोकामा विधायक अनंत सिंह के जनसुराज के साथ बढ़ती नजदीकी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच प्रशांत किशोर ने पहली बार अपना रुख स्पष्ट किया है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में अनंत सिंह के खुलकर सामने आने के बाद उनके जनसुराज में शामिल होने की अटकलें तेज हुई थीं। अब प्रशांत किशोर ने कहा है कि किसी नेता का चुनाव में समर्थन करना और पार्टी में शामिल होना अलग-अलग बातें हैं।

समर्थन करने वालों का पार्टी में शामिल होना जरूरी नहीं

प्रशांत किशोर ने अनंत सिंह से जुड़े सवाल पर कहा कि बड़ी संख्या में लोग जनसुराज का समर्थन कर रहे हैं। केवल समर्थन या वोट देने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति पार्टी में शामिल भी हो जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अनंत सिंह खुद जनसुराज में आने की घोषणा करते हैं, तभी पार्टी उनके शामिल होने पर कोई निर्णय लेगी। फिलहाल पार्टी की ओर से अनंत सिंह को लेकर ऐसा कोई निर्णय घोषित नहीं किया गया है।

बाहुबली के समर्थन पर भी पीके का जवाब

अनंत सिंह के समर्थन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच प्रशांत किशोर ने बाहुबली नेताओं के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जनसुराज की राजनीति का केंद्र आम लोगों की समस्याएं हैं।

उन्होंने सातवें वेतनमान की मांग करने वाले कर्मचारियों, वितरहित शिक्षकों के सम्मान और बेरोजगार युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को पार्टी की विचारधारा से जोड़ते हुए कहा कि इन मुद्दों पर जो लोग साथ आना चाहते हैं, वे जनसुराज से जुड़ सकते हैं। उनके मुताबिक किसी व्यक्ति की पहचान बाहुबली है या कुछ और, इससे ज्यादा महत्व पार्टी की विचारधारा और जनता के मुद्दों का है।

अनंत सिंह ने जनसुराज प्रत्याशी का किया खुला समर्थन

दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में होने वाले विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इसी बीच मोकामा विधायक अनंत सिंह ने जनसुराज प्रत्याशी अनुज सिंह के समर्थन में खुलकर प्रचार किया।

1 अक्टूबर को अनंत सिंह जनसुराज प्रत्याशी के नामांकन जुलूस में खुले वाहन पर सवार होकर शामिल हुए थे। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में 50 हजार रसगुल्ले बांटे जाने की बात भी सामने आई।

अनंत सिंह के इस राजनीतिक कदम को उनके जदयू से रिश्तों के मौजूदा समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।

नीरज कुमार से विवाद ने बढ़ाई जदयू की परेशानी

अनंत सिंह और जदयू के एमएलसी नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद भी इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।

अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि उनके घर में एके-47 रखवाकर उन्हें फंसाने की कोशिश की गई थी। वहीं नीरज कुमार ने आरोपों को लेकर अनंत सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई साक्ष्य है तो वह अदालत का रुख करें।

विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों नेताओं के बीच मंदिर में जाकर कसम खाने तक की चुनौती सामने आई। नीरज कुमार ने अनंत सिंह पर तीखा राजनीतिक तंज भी कसा।

पार्टी के लिए बढ़ता जा रहा है चुनौतीपूर्ण दौर

अनंत सिंह के जनसुराज प्रत्याशी के समर्थन में उतरने के बाद जदयू के सामने राजनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है। पार्टी के भीतर दोनों नेताओं के बीच विवाद सुलझाने की कोशिशें भी हुईं।

बताया गया कि मामले को शांत कराने के लिए वरिष्ठ नेताओं की ओर से हस्तक्षेप किया गया। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को भी विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा रही, लेकिन मामला पूरी तरह शांत नहीं हो सका। 7 सितंबर को पार्टी कार्यालय में हुई बैठक भी किसी निर्णायक समाधान तक नहीं पहुंची।

अब अनंत सिंह का जनसुराज प्रत्याशी के पक्ष में खुलकर उतरना जदयू के लिए नई राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

अनंत सिंह के अगले कदम पर टिकी नजर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अनंत सिंह भविष्य में जनसुराज में औपचारिक रूप से शामिल होने का ऐलान करते हैं या सिर्फ चुनावी समर्थन तक ही सीमित रहते हैं।

प्रशांत किशोर ने अपने बयान से यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी की ओर से अभी अनंत सिंह के शामिल होने को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। यदि अनंत सिंह स्वयं पार्टी में आने की घोषणा करते हैं, तभी इस मुद्दे पर जनसुराज अपना अगला कदम तय करेगा।

इस पूरे घटनाक्रम पर अब बिहार की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि एक तरफ विधान परिषद चुनाव की सरगर्मी बढ़ रही है और दूसरी तरफ जदयू के भीतर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है।

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संपादकीय विचार

बिहार की राजनीति में चुनावी समर्थन और औपचारिक राजनीतिक गठजोड़ के बीच अंतर को समझना जरूरी है। अनंत सिंह का जनसुराज प्रत्याशी के समर्थन में खुलकर उतरना निश्चित रूप से राजनीतिक संदेश देता है, लेकिन प्रशांत किशोर का बयान फिलहाल किसी औपचारिक राजनीतिक प्रवेश की पुष्टि नहीं करता।

आने वाले दिनों में अनंत सिंह का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा। यदि वह जनसुराज में शामिल होने की घोषणा करते हैं तो इसका असर केवल विधान परिषद चुनाव तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि जदयू के भीतर चल रहे विवाद और बिहार की व्यापक राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है।

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